सेवा
निःस्वार्थ सेवा आश्रम की पहली आहुति है। स्वयंसेवक मंदिर, रसोई, स्वास्थ्य शिविरों और उत्सवों में सहायता करते हैं — हर कार्य बाबा को अर्पण के रूप में।
पाँच उद्देश्य
हर प्राणी की सेवा ही साई की सेवा है।
निःस्वार्थ सेवा आश्रम की पहली आहुति है। स्वयंसेवक मंदिर, रसोई, स्वास्थ्य शिविरों और उत्सवों में सहायता करते हैं — हर कार्य बाबा को अर्पण के रूप में।
ध्यान, नाम-जप, भजन और सत्संग। स्वामीजी के प्रवचन दूर-दूर तक भक्तों तक बाबा का श्रद्धा और सबुरी का संदेश पहुँचाते हैं।
आश्रम से कोई भूखा नहीं लौटता। भक्तों, तीर्थयात्रियों और ग्रामवासियों को निःशुल्क प्रसाद और भोजन परोसा जाता है — जैसे बाबा स्वयं अपने पास आने वाले हर व्यक्ति को भोजन कराते थे।
निःशुल्क चिकित्सा सहायता और स्वास्थ्य शिविर पैठण क्षेत्र के उन गाँवों तक उपचार पहुँचाते हैं जहाँ डॉक्टर तक पहुँचना कठिन होता है।
सभी धर्मों का समान आदर। बाबा सबके थे, और उनका आश्रम भी सबका है — हर पथ के लोगों का स्वागत है।
दान
आपका दान अन्नदान, आरोग्य (निःशुल्क चिकित्सा) और मंदिर की दैनिक सेवा में सहायक है। हर दान पर आधिकारिक रसीद दी जाती है, और पात्र दान पर 80G कर-छूट प्रमाणपत्र मिलता है।