तीर्थ दर्शन
धूपखेड़ा — श्री साईबाबा प्रकट भूमि
हर साई भक्त के लिए तीर्थस्थल — जहाँ से शिरडी के साईबाबा की कथा आरंभ होती है।
धूपखेड़ा क्यों
बाबा के प्रथम भक्त की भूमि
धूपखेड़ा (जिसे धूपगांव भी कहते हैं) छत्रपति संभाजीनगर जिले की पैठण तहसील में दिनापुर रोड के पास स्थित है। भक्त इसे श्री साईबाबा प्रकट भूमि के रूप में पूजते हैं — वह भूमि जहाँ शिरडी आने से पहले साईबाबा दिखाई दिए थे, और चांद पाटिल का गाँव, जिन्हें बाबा के प्रथम भक्तों में गिना जाता है।
भक्तों की मान्यता है कि बाबा ने अपने प्रारंभिक जीवन के लगभग नौ वर्ष इसी क्षेत्र में बिताए। धूपखेड़ा से ही चांद पाटिल के परिवार के साथ बाबा पहली बार शिरडी गए — वह नगर जो जीवनभर उनका घर बना।
आज जनवरी 2000 में स्वामी बलदेव भारती जी द्वारा स्थापित श्री साईबाबा सेवा साधनाश्रम विश्व के प्रथम श्री साई गणेश मंदिर, दैनिक आरती, अन्नदान और वार्षिक साई रुद्र महोत्सव के माध्यम से इस स्मृति को जीवित रखे हुए है।
श्री साई सच्चरित्र, अध्याय 5
चांद पाटिल और खोई हुई घोड़ी
धूपखेड़ा के संपन्न व्यक्ति चांद पाटिल की घोड़ी खो गई थी। दो महीने तक खोजने पर भी वह नहीं मिली। निराश होकर लौटते समय उन्हें एक पेड़ की छाँव में विश्राम करते एक युवा फकीर मिले, जो कफनी पहने थे और हाथ में सटका (छोटी छड़ी) लिए थे।
फकीर ने उन्हें चिलम पीने के लिए बुलाया। चिलम जलाने के लिए उन्होंने चिमटा जमीन में गाड़ा और उसमें से जलता अंगारा निकाला; फिर सटका जमीन पर मारा तो कपड़ा भिगोने के लिए पानी निकल आया। फिर उन्होंने चांद पाटिल से पास के नाले में देखने को कहा — और वहीं खोई हुई घोड़ी मिल गई।
चकित होकर चांद पाटिल फकीर को धूपखेड़ा में अपने घर ले आए। कुछ समय बाद जब चांद पाटिल के परिवार की बारात शिरडी के लिए निकली, तो फकीर भी साथ गए। शिरडी के खंडोबा मंदिर में पुजारी म्हालसापति ने उनका स्वागत “या साई!” — “आइए साई!” — कहकर किया, और उसी दिन से संसार उन्हें साईबाबा के नाम से जानता है।
निंब वृक्ष
साईबाबा के जीवन में नीम का वृक्ष
साईबाबा की कथा में नीम के वृक्ष का विशेष स्थान है। श्री साई सच्चरित्र के अनुसार, जब बाबा पहली बार शिरडी में दिखाई दिए, तब वे लगभग सोलह वर्ष के युवक थे और एक नीम के पेड़ के नीचे गहन ध्यान में बैठे थे — गर्मी-सर्दी से अविचल, किसी से कुछ न बोलते हुए।
बाद में बाबा ने कहा कि उस नीम के नीचे का स्थान उनके गुरु का स्थान है। भक्त इसे गुरुस्थान कहते हैं और यह आज भी शिरडी के सबसे पवित्र स्थलों में से एक है। कहा जाता है कि इस नीम की पत्तियाँ, स्वभाव से कड़वी होते हुए भी, वहाँ खाने वालों को मीठी लगती थीं — बाबा की कृपा का प्रतीक।
धूपखेड़ा में भी आश्रम के भीतर एक प्राचीन वृक्ष भक्तों द्वारा पूजित है, जिसके मूल में एक छोटा मंदिर है जहाँ तीर्थयात्री रुककर प्रार्थना करते हैं — उस सादे जीवन की याद, जो बाबा ने शिरडी आने से पहले वृक्षों की छाँव में बिताया।
आश्रम में
दर्शनीय स्थल

श्री साई गणेश मंदिर
विश्व का प्रथम मंदिर जहाँ साईबाबा और श्री गणेश की एक साथ पूजा होती है।

साई–चांद पाटिल झांकी
बाबा और चांद पाटिल की पहली भेंट का 22 फीट ऊँचा स्मारक।

श्री दत्तात्रेय मूर्ति
त्रिमुखी आदिगुरु श्री गुरु दत्तात्रेय, जिनका आश्रम में श्रृंगार और पूजन होता है।

पवित्र वृक्ष
प्राचीन वृक्ष और उसके मूल में मंदिर — प्रार्थना के लिए शांत स्थान।

छत्री एवं पवित्र स्थान
आश्रम परिसर में स्थित पवित्र स्मारक।

मंदिर एवं अन्नदान
हर आगंतुक के लिए दैनिक आरती और निःशुल्क प्रसाद।
पर्यटन
अपनी यात्रा को पूर्ण बनाएँ
धूपखेड़ा महाराष्ट्र के सबसे समृद्ध तीर्थ और धरोहर क्षेत्रों में से एक में स्थित है।
पैठण
गोदावरी तट पर संत एकनाथ महाराज की पावन नगरी — नाथ मंदिर और समाधि, जायकवाड़ी का ज्ञानेश्वर उद्यान और प्रसिद्ध पैठणी रेशम बुनकर।
शिरडी
बाबा की यात्रा शिरडी तक जारी रखें — समाधि मंदिर, द्वारकामाई, चावड़ी और गुरुस्थान का नीम। संभाजीनगर क्षेत्र से सड़क मार्ग से लगभग तीन घंटे।
छत्रपति संभाजीनगर
यूनेस्को विश्व धरोहर एलोरा और अजंता गुफाओं, घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग, दौलताबाद किला और बीबी का मकबरा का प्रवेश द्वार।
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